सहकारी सोसाइटी के पुनर्गठन से संबंधित याचिका पर हाइकोर्ट में हुई सुनवाई।

बिलासपुर

ब्यूरो –

राज्य सरकार द्वारा सहकारी संगठनों के पुनर्गठन के लिए किये गए संशोधनों के विरुद्ध सहकारी सोसाइटीयो के पुनर्गठन योजना 2019 की याचिका पर माननीय उच्च न्यायलय में सुनवाई।
माननीय उच्च न्यायलय में शुक्रवार को विभिन्न सहकारी सोसाइटीयो द्वारा याचिका प्रस्तुत की गई जिसकी सुनवाई जस्टिस गौतम भादुड़ी की एकल पीठ में हुई। मामले में माननीय उच्च न्यायलय ने राज्य सरकार को तीन हफ्तों का वक़्त दिया गया है। और साथ मैं यह भी कहा है की सरकार जो भी नयी सहकारी सोसाइटी को पुनर्गठित करेगी वह इस याचिका के फैसले अध्याधीन होगी।


राज्य सरकार द्वारा दिनांक 25.07.2019 को धारा 16 (ग) छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम 1960 , के तहत सहकारी सोसाइटी के पुनर्गठन हेतु एक योजना ‘ प्रदेश के प्राथमिक कृषि साख-सहकारी सोसाइटीयो के पुनर्गठन योजना 2019 के तहत सहकारी सोसाटीयो को संचालित करने के सारे अधिकार उप/सहायक रजिस्ट्रार को दिए गए थे। उसके बाद शासन की उक्त कंडिका से व्यथित होकर कुछ सहकारी सोसाइटीयो द्वारा माननीय उच्च न्यायलय में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई पश्चात माननीय उच्च न्यायालय द्वारा कंडिका 8 को अवैधानिक घोषित करते हुए संस्थाओ की याचिकाओं को स्वीकृत कर लिया था। दिनांक 07.03.2020 को राज्य सरकार द्वारा पुनः एक नयी संशोधित योजना सहकारी सोसाइटीयो को पुनर्गठित करने के लिए जारी की गई। उक्त योजना में कंडिका 8 को विलोपित करते हुए कंडिका 5 में भी सहकारी सोसाइटीयो को पुनर्गठित करने हेतु नयी प्रक्रिया जोड़ी गई। परन्तु कंडिका 5 में निर्धारित योजना के अनुसार कार्यवाही न करते हुए राज्य सरकार द्वारा मनमाने तरीके से जिला महासमुंद में सहकारी सोसाइटीयो का पुनर्गठन किया गया ,जिसके फलस्वरुप कुछ सहकारी सोसाइटीयो द्वारा माननीय उच्च न्यायलय में विभिन्न याचिकाए दायर की गई। जिनकी पैरवी शर्मीला सिंघई अधिवक्ता के द्वारा की गई। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता के तर्कों पर विचार करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन हफ्ते का समय जवाब प्रस्तुत करने हेतु दिया है ,और साथ में यह भी निर्देश दिया की सरकार जो भी नयी सहकारी सोसाइटी को पुनर्गठित करेगी ।वह इस याचिका के फैसले अध्याधीन होगी।

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