भूपेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट, गौठान निर्माण में जमकर हुआ भ्रष्टाचार।

मस्तूरी

ब्यूरो –

जब अपने ही काम का आंकलन स्वयं करना हो तो भ्रष्टाचार करते समय कोई संकोच और कमी नही होगी।इसका उदारहण मस्तूरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत अमलडीहा और कुकुर्दीकला का गौठान निर्माण में देखने को मिला है।इन गौठानो का निर्माण स्वयं तकनीकी सहायक द्वारा कराया गया है।गौठान निर्माण पूर्ण होने के पहले ही यहां पानी चारे के लिए बनाए गए वाटर टैंक खराब हो चुके हैं।लेकिन कागजों में गौठानो में सब कुछ ठीक दिखाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी योजना नरवा गरवा घुरवा बारी का हाल बेहाल है ।छत्तीसगढ़ शासन की तरफ से बनाए जा रहे गौठानो में तकनीकी सहायक जिसको काम की देख रेख करने के लिए सही तरीके से सभी कामों को कराए जाने के लिए जिम्मेदारी दी गयी थी ।उसी इस योजना को पलीता लगा दिया। प्रमोद बंजारे जो स्वयं मस्तूरी जनपद में तकनीकी सहायक के पद पर कार्यरत हैं, जिनकी देखरेख में अमलडीहा पंचायत व कुकुरदीकला पंचायत में गौठान निर्माण कराया गया था ।ताज्जुब की बात तो यह है कि दोनो पंचायतों में गौठान निर्माण हो गया है। परन्तु गौठान का निर्माण ना सरपंच ने किया है ना किसी जनप्रतिनिधि ने और न ही किसी ठेकेदार ने कराया है।दोनों ही पंचायत के सरपंच के बताए अनुसार खुद प्रमोद बंजारे तकनीकी सहायक ने सभी काम एक ठेकेदार की तरह किया है। अब सवाल यह उठता है कि अगर इंजीनियर ही सभी कामों को ठेका लेकर करने लगे तो उसकी गुणवत्ता की जांच कौन करेगा?सही और गलत होने की जानकारी ऊपर के अधिकारियों को कौन देगा?इससे साफ जाहिर होता है कि इन दोनों ही पंचायत के गोठान में भारी लापरवाही बरती गई है, और ना सिर्फ शासन को चुना लगाया गया है। बल्कि तकनीकी सहायक के द्वारा अपनी स्वयं की जेब भरने के लिए आंख बंद करके सभी कामों को पास कराया गया है ।पंचायतों के सरपंचों का कहना है कि नाम मात्र के लिए हमारा नाम उपयोग किया गया है ।बाकी पूरा काम प्रमोद बंजारे तकनीकी सहायक के द्वारा किया गया ।मामला यहीं खत्म नहीं होता दोनों ही पंचायतों में बने गोठानो की हालत बद से बदतर हो गई है। गौठानो में काम पूर्णता की ओर है पर देखने से ऐसा लग रहा है,जैसे अभी बहुत काम बाकी हैं। लेकिन पैसा निकाला जा चुका है ।जिन लोगों ने वहां मजदूरी की है उनमे से कई लोगो का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। इन सब के विपरीत चलिए 1 मिनट के लिए सब हम मान लेते हैं कि सरकारी काम में पेमेंट ऊपर नीचे आगे पीछे हो भी जाता है तो कम से कम काम तो सही तरीके से करवा लेते इंजीनियर साहब पर यहां इंजीनियर के द्वारा बनवाए गए वाटर टैंक पूरी तरह से फट चुके हैं । बावजूद इसके इंजीनियर साहब आंख बंद करके काम करवा रहे हैं,क्योंकि ठेकेदार स्वयं है, इसीलिए किसको बोलने जाएंगे। ना ऊपर के अधिकारियों को बता सकते हैं और ना काम करने वाले लोगों को कुछ बोल सकते हैं क्योंकि सवाल यहां पर जेब का है। रही बात मस्तूरी जनपद पंचायत के कार्यक्रम अधिकारी विकास जायसवाल की तो ऐसा मालूम होता है कि उन्होंने प्रमोद बंजारे को पूरी छूट दे रखी है। आपके जो मन में आए करो जैसा करना है करो जैसा करवाना है करो तभी तो यह महाशय इतनी बिंदास होकर इतनी लापरवाही कर रहे हैं।

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