दशहरा सबकी ज़िन्दगी के लिए खास,जो चाहें सीखें!

तख़तपुर

राकेश मिश्रा –

हम सब दशहरा मनाते हैं यही सोचते हैं कि यह बुराई पर अच्छाई की,असत्य पर सत्य की और अधर्म पर धर्म की जीत है।लेकिन कई मायनों में यह हर किसी को कुछ न कुछ सीख दे जाता है।

पहली सीख तो यही कि जिस देश और राज्य में नारी का सम्मान नही होगा,उसे भोग की विषय वस्तु माना जायेगा वहां का भला भगवान भी नही कर सकते।जैसे लंकापति और लंका वासियों को स्वयं श्री राम के दर्शन और उपस्थिति भी काल से नही बचा सका।क्योंकि रावण ने एक नारी को बलात हरण करके उसका अपमान करने की चेष्टा की । लंका के निवासियों ने जिस भी कारण से हो उसके कुकृत्य में साथ दिया।उनका नाश हुआ लेकिन जिन्होंने रावण के इस अपकीर्ति कारक कृत्य का विरोध किया और उसे समझाने का प्रयास किया वे बचे रहे।

दूसरी सीख यह कि आप कितने ही विद्वान और प्रकांड ज्ञाता हो आपका का अहंकार समाज मे आपको सम्मान से वंचित कर देगा,और जब तक आपके जानने वाले इस दुनिया मे रहेंगे आपकी विद्वता बाद में याद करेंगे आपके अहंकारी चरित्र की चर्चा पहले करेंगे। इसलिए आप जितने बड़े होते जाए एक फलदार वृक्ष की तरह उतने ही नम्र और उदार हो तो संसार आपकी यश गाथा सदियों तक गाता रहेगा चाहे लोग आपको व्यक्तिगत रूप जानते हो या नही।

आपकी एक गलती न केवल आपको विनाश के मार्ग पर ले जाता है वरन साथ में परिवार के लिए भी लाख मुसीबतें लेकर आता है ।आपके किसी गलत आचरण का भार आपके पूरे कुल खानदान को उठाना पड़ सकता है।हो सकता है कि आपके कुकर्मो की परिणति आपके स्नेहीजनों के प्राणोंत्सर्ग के रूप में सामने आए और आपको पछतावे के सिवा कुछ भी करने का अवसर न मिले।इसलिए कोई भी कर्म करते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि उसका परिणाम क्या हो सकता है और वह आपके परिवार पर कोई विपरीत प्रभाव तो नही पड़ेगा।

विचार का जितना अधिक मंथन करेंगे नये नये सूत्र और संदेश निकलते रहेंगे।लेकिन सार यही है कि बुरे कर्मो से जितना हो सके बचें । यदि किसी परिस्थितिवश कोई विपरीत आचरण करना पड़ ही जाए तो उसकी आंच आपके पारिवारिक जनों तक पहुंच सकता है, इसे न भूलें। जितना बचा सकें बचाएं ।अहंकार को कभी अपने व्यवहार का अंश न बनने दें यह आपको कभी सम्मान नही दिला सकता।

इन्ही विचारों के साथ

MKM की ओर से आप सबको विजयदशमी की मंगल कामनाएं

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