कोरोना का मरीज ही ठीक करेगा दूसरे मरीज,आईसीएमआर ने दी ट्रायल की अनुमति

दिल्ली

ब्यूरो-अब तक ला इलाज कहे जा कोरोना के इलाज के लिए एक नई उम्मीद की किरण दिख रही है।अब कोरोना के ठीक हो चुके मरीज के रक्त प्लाज्मा से कोरोना के नए मरीजो के इलाज की संभावनाएं तलाशी जा रही है।इसके लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान ने पांच आयुर्विज्ञान संस्थान को परीक्षण करने की अनुमति दे दी है।एम्स के प्रोफेसर डॉ नवल विक्रम ने बताया है कि कोरोना के ठीक हुए एक मरीज से चार मरीजो का इलाज किया जा सकता है।

कोरोना के इलाज के लिए अनुसंधान में लगे मेडिकल साइंटिस्टों के बीच इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर है , कि ठीक हुए कोरोना मरीज के रक्त प्लाज्मा को लेकर कोई वैक्सीन तैयार किया जा सकता है क्या?अब अनुसंधान विशेषज्ञ इस दिशा में काम कर रहे हैं।इस बीच आईसीएमआर ने भी पाँच आयुर्विज्ञान संस्थानों को रक्त प्लाज्मा से कोरोना के इलाज का परीक्षण करने की अनुमति दे दी है।

पूरी कवायद इस सिद्धांत पर आधारित है कि कोरोना के मरीज के रक्त प्लाज्मा में कोरोना के कोरोना वायरस के विरुद्ध एंटीबॉडी का निर्माण हो जाता है जो कोरोना वायरस को बढ़ने से रोकता है और मरीज ठीक हो जाता है।इसी एंटीबाडी को नए मरीजो में रक्त प्लाज्मा के द्वारा पहुंचाकर उनके शरीर मे भी वही प्रतिरोधक क्षमता उतपन्न की जा सकती है,और मरीज को ठीक किया जा सकता है।इस पद्धति में एक ठीक हुए मरीज के रक्त प्लाज़मा से चार नए मरीजो का इलाज संभव बताया जा रहा है।

कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के रक्त प्लाज्मा से अब इस रोग से पीड़ित अन्य मरीजों का उपचार किया जा सकेगा। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने रक्त प्लाज्मा से इस रोग के मरीजों के उपचार के ट्रायल की अनुमति दे दी है। एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर नवल विक्रम ने बताया कि कोरोना से ठीक हो चुके एक व्यक्ति के खून से कोरोना पीड़ित चार लोगों का इलाज किया जा सकता है।

इस इलाज की प्रक्रिया में एक दाता मरीज के रक्त से एफेरेसिस के द्वारा 800 मिली रक्त प्लाज्मा निकाला जाता है।जिसे चार अलग-अलग कोरोना मरीजो के रक्त में डाल कर उनके शरीर मे भी वही एंटीबॉडी बनाकर कोरोना के प्रति प्रतिरोध क्षमता बढ़ाया जाता है,जिससे वह कोरोना के वायरस से लड़ने में ज्यादा सक्षम हो जाता है। ठीक हुए मरीज से रक्त प्लाज़मा स्वस्थ्य होने 14 दिन के बाद और दो कोरोना टेस्ट और एलिसा टेस्ट के बाद ही लिया जाता है। इस प्रक्रिया में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि दाता व्यक्ति को कोरोना सहित किसी भी प्रकार की बीमारी न हो ।

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