अपने खिलाफ मीडिया में खबरें छपने से पद की गरिमा भूला तहसीलदार

कोटा

ब्यूरो

करगी-कोटा अपने दुर्व्यवहार के खिलाफ लामबन्द हुए पत्रकारों के द्वारा तहसीलदार हटाओ ,कोटा बचाओ की मुहिम चलाने और लगातार खबरे छपने से कोटा तहसीलदार पी के गुप्ता अपने पद की मर्यादा भूलते जा रहे है।इसी क्रम में वे एक समाचार पत्रिका के संवाददाता के खिलाफ सोशल मीडिया में व्यक्तिगत और ओछी टिप्पणी करने से नही चुके।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा तहसीलदार पी के गुप्ता द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पंचायत नामांकन के लिए एक महिला अभ्यर्थी से 25 हजार रिश्वत मांगे जाने के लिए सवाल करने आये पत्रकारों से दुर्व्यवहार कर दिया था।इसके विरुद्ध पत्रकारों ने तहसीलदार के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने की मुहिम चला रखी है।और लगातार किसी न किसी मीडिया या अखबार में तहसीलदार के दुर्व्यहार के विरुद्ध लिखा जा रहा है।साथ ही तहसीलदार के विरुद्ध मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया है।इससे तिलमिलाए तहसीलदार कोटा पी के गुप्ता द्वारा अब अपने पद की मर्यादा से नीचे आते हुए सोशल मीडिया में पत्रकारों पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना शुरू कर दिए हैं।

मामला यह है कि अपने खिलाफ छपी खबर की प्रतिक्रिया करते हुए एक पत्रकार और नगर पंचायत चुनाव में कोटा के एक वार्ड से आप पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद जावेद खान के ऊपर सोशल मीडिया में टिप्पणी करते हुए लिखा ” 06 वोट पाने का प्रभाव “।दरअसल मोहम्मद जावेद को इस चुनाव में 06 मत प्राप्त हुए थे।इसे ही लेकर तहसीलदार द्वारा यह टिप्पणी की गई थी।लेकिन वह यह भूल गए कि यह लोकतंत्र है यहाँ एक एक वोट का महत्व है।इसे लेकर मजाक नही बनाया जा सकता है।लोगो की किस्मत एक वोट से भी बन और बिगड़ सकती है।दूसरा यह कि वह लोकतंत्र के इस यज्ञ में एक रिटर्निंग अफसर की भूमिका में भी है।इतने जिम्मेदार पद और दायित्व का निर्वहन करते हुए भी एक अमर्यादित टिप्पणी करना कहीं से भी शोभनीय नही कहा जा सकता।

वैसे तहसीलदार की इस हरकत से किसी को उतना आश्चर्य भी नही होगा क्योंकि कोटा तहसीलदार और मर्यादित आचरण का कही कोई संबंध नही दिखता ।वे जहां भी रहे विवादों में रहे।अभी नगर पंचायत चुनाव के दौरान भी एक महिला अभ्यर्थी के विरुद्ध बहुत ही गंभीर और अमर्यादित शब्दो का प्रयोग कर दिया था।जिस पर भी पत्रकारों के साथ विवाद हुआ था।अबकी बार रिश्वत मांगने को लेकर भी पत्रकारों से उलझ गए थे।असल में गुप्ता की समस्या पद का गुरुर और अधिकारों का अहंकार है जो उसे किसी भी समय पद की गरिमा से गिरने के लिए प्रेरित कर देता है।

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