महाविद्यालय जाना बना जान में जोखिम का सबब,सड़क सुधारने की नहीं ले रहे सुध।

मस्तूरी

सूरज सिंह –

शासकीय पातालेश्वर महाविद्यालय मस्तूरी पहुंच मार्ग की स्थिति वर्षों से खराब है दिन ब दिन और स्थिति खराब हो रहा है। इसको लेकर यूथ कांग्रेस मस्तूरी के द्वारा एसडीएम कार्यालय का घेराव भी किया गया था,जिसके बाद शासन हरकत में आई थी और रोड के लिए एक करोड़ 8 लाख के आसपास पैसा पास हो चुका है। पर इस रोड में अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है ना ही इसकी मरम्मत हो पा रही है। रोड में जगह-जगह इतने बड़े-बड़े गड्ढे हैं कि साइकिल चलाना दुभर है, चार पहिया वाहन की तो बात ही छोड़िए ।मालूम हो कि इसी रोड पर मस्तूरी क्षेत्र का एक मात्र महाविद्यालय स्थित है,जहां ग्रामीण अंचल से साइकल से छात्र-छात्राएं महाविद्यालय आते हैं । आने जाने वाले सभी छात्र छात्राओं को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन इस रोड की वजह से छात्र-छात्राएं चोटिल हो रहे हैं ।भारी वाहनों के आते जाते समय छात्र छात्राओं के ऊपर कीचड़ उड़ने से कपड़े गंदे हो जाते हैं कई बार छात्र-छात्राएं कीचड़ में गिर जाते हैं ,जिसकी वजह से उनको घर वापिस जाना पड़ता है। न सिर्फ छात्र-छात्राएं बल्कि उस रोड से आने जाने वाले ग्रामीण भी रोड में गिरकर चोटिल हो रहे हैं ।रोड में इतने बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं कि रोड को देखने से ऐसा लगता है जैसे यह रोड किसी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रित कर रहा है ।बीते गुरुवार को चाइनीस नाम का लड़का जो ग्राम कोसमडीह का निवासी है ,वह अपने घर से मस्तूरी जा रहा था और गाड़ी का चक्का गड्ढे में जाकर घुस गया जिसके वजह से वह रोड पर गिर गया उसको हाथ पैर और सीने में गंभीर चोटें आई हैं। जिसका इलाज अभी जारी है ज्ञात हो कि कांग्रेस अध्यक्ष नितेश सिंह ठाकुर के नेतृत्व में एसडीएम कार्यालय का घेराव हुआ था तब तत्कालीन एसडीएम ने जानकारी दी थी कि रोड के लिए राशि पास हो गई है ।टेंडर जारी होते ही रोड को बनवा दिया जाएगा, पर आज तक उस रोड में मरम्मत का भी कार्य शुरू नहीं हो पाया। मस्तूरी के अनुविभागीय अधिकारी एसडीएम भी बदल चुके हैं,पर रोड की स्थिति अभी भी वैसा का वैसा ही बना हुआ है ऐसा नहीं है कि रोड अपने आप खराब हो रहा है ।इस क्षेत्र में 10 से 20 पत्थर खदान संचालित हो रहा है जहां से भारी वहां रोज इस रोड से होकर गुजर रही है,जिसके वजह से रोड की स्थिति और बद से बदतर होती जा रही है। बारिश के समय में तो छात्र छात्राओं को पैदल जाने में भी भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था जो पत्थर खदान वाले उपयोग करके अपना धंधा चला रहे हैं, वह भी इस रोड के बारे में कुछ नहीं सोचते।यदि वे चाहते तो रोड में सभी खदान के मालिक एक-एक हाईवा माल गिरवा देते तो खोड़ा विद्यार्थियों को राहत मिल जाता। पर यहां तो सिर्फ पत्थर खदान के मालिक निजी स्वार्थ को देख रहे हैं, जिसके वजह से ग्रामीणों में छात्र-छात्राओं वह महाविद्यालय के स्टाफ को आने जाने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है इस विषय में जब उच्च अधिकारियों से बात की जाती है तो उनका कहना होता है कि टेंडर जारी होने वाला है या हो चुका है पर यह बात अभी तक समझ से परे है कि इस रोड की काम कब शुरू होगी और कब यह रोड बनेगा और कब छात्र-छात्राओं ग्रामीणों का महाविद्यालय स्टाफ को समस्याओं से निजाद मिलेगा।

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