क्वारंटाइन सेंटर के लिए दर दर भटकते मजदूर, प्रशासन की असंवेदनशीलता से जंगल में भूखे प्यासे बिताई रात!

बेलगहना

रविराज रजक– प्रशासन की लापरवाही और असंवेदनशीलता के चलते इलाहाबाद से आये मस्तूरी क्षेत्र के प्रवासी मजदूर,एक अदद क्वारंटाइन सेंटर के लिए दिन भर भटकते रहे और रात उन्हें घने जंगल मे व्यतीत करना पड़ा।मस्तूरी क्षेत्र में प्रवासी मजदूरों की संख्या अधिक होने के कारण उन्हें दूसरे क्षेत्र के क्वारंटाइन सेंटर भेजे जा रहे है।लेकिन प्रशासन ने इसके लिए पुख्ता व्यवस्था नही किया है।इसके चलते मजदूरों को लेकर बस जहाँ भी गयी उन्हें वहां से भगा दिया गया।इसी कारण दिन भर भटकते रहे और वापसी में बस का डीजल खत्म हो जाने के कारण पूरी रात भूखे-प्यासे घने जंगल के जंगली जानवरों के खौफ के बीच गुजारा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मस्तूरी क्षेत्र के 75 मजदूरों को ,जो इलाहाबाद से आये थे कोटा क्षेत्र में क्वारंटाइन करने के लिए बस से भेजे गए ।प्रशासन की ओर से बस में कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति नही था।मजदूरों से भरी बस जब रानी सागर ग्राम पंचायत पहुंची तो वहां के लोगों ने कोरोना के डर से बस को भगा दिया ।यह बस वहां से करगी पहुंची तो करगी के लोगों ने भी भगा दिया ।वहां से बस बहरामोड़ा गयी वहां भी मजदूरों को विरोध का सामना करना पड़ा।किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति के बस में नही होने से मजदूरों को क्वारंटाइन सेंटर में नही रखा गया।ऐसा करते-करते जब बस वापसी में बेलगहना को पार कर घनघोर जंगल में पहुंची तो डीजल खत्म हो गया, और मजदूरों को रात जंगल मे ही बितानी पड़ी ।इस बीच प्रशासन के किसी जिम्मेदार व्यक्ति के नही होने के कारण दिन भर उन्हें भोजन- पानी भी नसीब नही हुआ।रात में भी मजदूर और उनके बच्चों को भूखा ही रहना पड़ा। मजदूरों को पानी प्यास लगी तो पास के बांध से गंदा पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई ,और कुछ उनके पास बचा खुचा था, उसे खाकर रात काटी। जब हमारे रिपोर्टर रविराज को यह बात पता चली तो तत्काल वहां पहुंचकर नायाब तहसीलदार शिवम पांडेय को अवगत कराया। तो नायब तहसीलदार ने मजदूरों के लिए नाश्ते का प्रबंध किया। उसके पश्चात बड़े अधिकारियों को इन सभी बातों से अवगत कराया। बेलगहना ग्राम पंचायत के उपसरपंच कपिल जायसवाल ने पहुंचकर लोगों को मदद की।बिना पुख्ता इंतेजाम और जिम्मेदार व्यक्ति के बस को कहीं भी भेज कर मजदूरों के साथ मजाक।किया जा रहा है।यदि प्रशासन के पास व्यवस्था नही है तो उन्हें उनके घरों में ही होने क्वारंटाइन कर दिया जाए।कम से कम इस तरह दर दर भटकना और अपमानित तो नही होना पड़ेगा।

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